Friday, December 27, 2019

कज़ाकस्तान में 100 लोगों को ले जा रहा विमान दुर्घटनाग्रस्त, 15 की मौत

कज़ाकस्तान में 100 लोगों को लेकर जा रहा एक विमान जे़ड 92100 दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. अधिकारियों के मुताबिक़ इसमें 15 लोगों की मौत हो गई है.
मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
कज़ाकस्तान के आंतरिक मंत्री ने बताया कि मृतकों में छह बच्चे भी शामिल हैं. इस हादसे में आठ बच्चों समेत 60 लोग घायल हुए हैं. एयरपोर्ट ने बताया कि घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है.
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कज़ाकस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायव ने इस हादसे पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों को क़ानून के मुताबिक़ कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी.
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हवाई अड्डे के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह अल्माटी हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ समय के बाद ही बेक एयर का जे़ड92100 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
अल्माटी एयरपोर्ट ने बताया कि विमान में बताया कि विमान में 95 यात्री और चालक दल के पांच सदस्य थे. इसके मुताबिक़, दो मंज़िला इमारत से टकराने से पहले स्थानीय समयानुसार विमान ने स्थानीय समयानुसार 7.22 बजे अपना नियंत्रण खो दिया.
मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है मगर घटनास्थल के पास मौजूद समाचार एजेंसी रॉयटर्स के रिपोर्टर ने बताया कि उस समय इलाक़े में गहरी धुंध थी.
मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
न्यूज़ वेबसाइट 'टेंगरी' के अनुसार घटना में बची मराल इरमन नाम की महिला ने कहा कि टेक ऑफ़ करने के दौरान विमान हिल रहा था. उन्होंने कहा, "शुरू में लगा कि शायद विमान लैंड कर गया है मगर असल में ये किसी चीज़ से टकरा गया था. बाद में मैंने देखा कि प्लेन दो टुकड़ों में बंट गया था."
मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
घटना के शुरुआती फुटेज़ में बचावकर्मी घटनास्थल पर काम करते नज़र आए. इसमें एक महिला को एंबुलेंस के लिए आवाज़ लगाते सुना जा सकता है.
मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह
एयरपोर्ट की ओर से इस हादसे में बचे 60 लोगों की सूची जारी की गई है जिनका इलाज चल रहा है.

दुर्घटना की जांच के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगा.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

कज़ाकस्तान में 100 लोगों को लेकर जा रहा एक विमान जे़ड 92100 दुर्घटनाग्रस्त हो गया है. अधिकारियों के मुताबिक़ इसमें 15 लोगों की मौत हो गई है.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

कज़ाकस्तान के आंतरिक मंत्री ने बताया कि मृतकों में छह बच्चे भी शामिल हैं. इस हादसे में आठ बच्चों समेत 60 लोग घायल हुए हैं. एयरपोर्ट ने बताया कि घायलों को स्थानीय अस्पताल ले जाया गया है.
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कज़ाकस्तान के राष्ट्रपति कासिम-जोमार्ट तोकायव ने इस हादसे पर अपनी गहरी संवेदना प्रकट की है. इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हादसे के लिए ज़िम्मेदार लोगों को क़ानून के मुताबिक़ कड़ी से कड़ी सज़ा दी जाएगी.
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हवाई अड्डे के अधिकारियों के मुताबिक शुक्रवार की सुबह अल्माटी हवाई अड्डे से उड़ान भरने के कुछ समय के बाद ही बेक एयर का जे़ड92100 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
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अल्माटी एयरपोर्ट ने बताया कि विमान में बताया कि विमान में 95 यात्री और चालक दल के पांच सदस्य थे. इसके मुताबिक़, दो मंज़िला इमारत से टकराने से पहले स्थानीय समयानुसार विमान ने स्थानीय समयानुसार 7.22 बजे अपना नियंत्रण खो दिया.मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

दुर्घटना के कारणों का अभी तक पता नहीं चल पाया है मगर घटनास्थल के पास मौजूद समाचार एजेंसी रॉयटर्स के रिपोर्टर ने बताया कि उस समय इलाक़े में गहरी धुंध थी.
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न्यूज़ वेबसाइट 'टेंगरी' के अनुसार घटना में बची मराल इरमन नाम की महिला ने कहा कि टेक ऑफ़ करने के दौरान विमान हिल रहा था. उन्होंने कहा, "शुरू में लगा कि शायद विमान लैंड कर गया है मगर असल में ये किसी चीज़ से टकरा गया था. बाद में मैंने देखा कि प्लेन दो टुकड़ों में बंट गया था."
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घटना के शुरुआती फुटेज़ में बचावकर्मी घटनास्थल पर काम करते नज़र आए. इसमें एक महिला को एंबुलेंस के लिए आवाज़ लगाते सुना जा सकता है.
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एयरपोर्ट की ओर से इस हादसे में बचे 60 लोगों की सूची जारी की गई है जिनका इलाज चल रहा है.

दुर्घटना की जांच के लिए एक विशेष आयोग का गठन किया जाएगा. मुक्त अश्लील सेक्स और अनल सेक्स संग्रह

Monday, December 9, 2019

रूस के ओलंपिक और फुटबॉल वर्ल्ड कप में हिस्सा लेने पर प्रतिबंध

विश्व डोपिंग रोधी एजेंसी (वाडा) ने रूस के सभी प्रमुख खेल प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेने पर चार साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया है.

इसका मतलब है कि रूस का झंडा और राष्ट्रगान टोक्यो में अगले साल होने वाले ओलंपिक और 2022 में क़तर में होने वाले फ़ुटबॉल विश्व कप में शामिल नहीं होगा.

हालांकि, जो खिलाड़ी यह साबित कर पाएंगे कि वो डोपिंग कांड से बाहर रहे हैं वो एक तटस्थ झंडे के तले खेल प्रतियोगिताओं में भाग ले पाएंगे.

स्विट्ज़रलैंड के लुसाने में वाडा की कार्यकारी समिति की बैठक में एकमत से यह प्रस्ताव लिया गया है.

वाडा का यह फ़ैसला रूस की डोपिंग रोधी एजेंसी (रुसाडा) के ग़ैर-संगत व्यवहार के बाद आया है. जनवरी 2019 में पाया गया था कि रुसाडा ने जांचकर्ताओं को दिए लेब डेटा में हेरफेर किए थे.

राज्य प्रायोजित डोपिंग कांड के सामने आने के बाद वाडा ने रूस पर तीन साल के लिए प्रतिबंध लगा दिया था जिसके बाद 2018 में रूस की डोपिंग एजेंसी ने वाडा को इस शर्त पर अपना डेटा दिया था कि वो उससे प्रतिबंध हटा देगा. उस समय रूस पर से प्रतिबंध हटा दिया गया था.

वाडा के इस प्रतिबंध के ख़िलाफ़ अपील करने के लिए रूस के पास 21 दिन का समय है.

2014 में सोची शीतकालीन ओलंपिक के दौरान रूस पर प्रतिबंध लगाया गया था जिसके बाद पिछले साल प्योंगचेंग में हुए शीतकालीन ओलंपिक में रूस के 168 खिलाड़ियों ने एक तटस्थ झंडे के तले प्रतियोगिता में भाग लिया था.

रूस पर एथलेटिक्स में भाग लेने पर 2015 से प्रतिबंध है.

इस प्रतिबंध के बावजूद रूस यूरो 2020 फ़ुटबॉल प्रतियोगिता में भाग ले पाएगा. यह प्रतियोगिता इस बार रूस के सेंट पीट्सबर्ग शहर में हो रही है.

डोपिंग रोधी उल्लंघन के नियमों के तौर पर यूरोपियन फ़ुटबॉल की गवर्निंग बॉडी यूएफ़ा को 'मुख्य खेल संगठन' नहीं माना जाता है.

Tuesday, December 3, 2019

हैदराबाद: क्या हम बलात्कारी मर्द बनकर ख़ुश हैं?: नज़रिया

सवाल एक है और सालों से घूम रहा है. हर बार जब बलात्‍कार की कोई घटना सुर्ख़‍ियों में आती है तो यह सवाल घूमने लगता है.

दिक्‍कत यह है कि इसका जवाब एक नहीं है. हम सभी, जवाब पर एकमत नहीं हैं. कुछ जवाब मर्दाना समाज की तरफ़ से हैं. कुछ जवाब स्‍त्र‍ियों की ओर से हैं. कुछ जवाब बहुत ज़्यादा व्‍यापक और गंभीर सवाल खड़े करते हैं. हम भी कोशिश करते हैं. मुकम्‍मल जवाब का दावा नहीं, कोशिश ही है.

किसी की इच्‍छा के ख़िलाफ़ किया गया काम बलात्‍कार है. किसी पर अपनी ख्‍़वाहिश को जबरन थोपना बलात्‍कार है. यक़ीनन यह क़ानूनी परिभाषा नहीं है. उस पर चर्चा फिर कभी. हम अभी कुछ मोटा-मोटी बात करते हैं.

सवाल यही है कि मर्द बलात्‍कार क्‍यों करते हैं?

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम 'अपनी' यौन इच्‍छा पूरी करना चाहते हैं. इसमें दूसरे की इच्‍छा की कोई जगह नहीं है. हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपनी तनाव भरी उत्‍तेजना को किसी और की इच्‍छा और रज़ामंदी के बग़ैर शांत करना चाहते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपनी क्षणिक उत्‍तेजना को शांत करने के लिए एक जगह तलाशते हैं. स्‍त्री शरीर में हमें वह जगह दिखाई देती है. मगर कई बार यह जगह हमें छोटे बच्‍चे-बच्‍च‍ियों और जानवरों में भी साफ़ नज़र आती है.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम स्‍त्री देह को काबू में करना चाहते हैं. हम मर्द बलात्‍कार करते हैं, क्‍योंकि हम स्‍त्री देह को अपनी निजी जायदाद मानते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं, क्‍योंकि हम बदला लेना चाहते हैं. हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपने से अलग जाति या धर्म के मर्दों को सबक सिखाना और नीचा दिखाना चाहते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं क्‍योंकि हम अपने से अलग जाति या धर्म या समुदाय की 'इज्‍़ज़त' को मटियामेट करना चाहते हैं.

हम मर्द बलात्‍कार करते हैं और बलात्‍कार के लिए रिश्‍ते बनाते हैं. रिश्‍तों को सुंदर-सा नाम देते हैं. फिर बलात्‍कार का हक़ हासिल करते हैं. फिर हक़ के साथ बलात्‍कार करते हैं.

हम मर्द हैं और इसलिए अक्सर हम मजबूर और कमज़ोर को तलाशते हैं. चॉकलेट पर फुसल जाने वाले की खोज में रहते हैं. हम मर्द हैं और हमारी नीयत में बलात्‍कार है.

हम मर्द हैं. चालाक हैं. रंग बदलने में बहुत माहिर हैं. इसलिए बलात्‍कार करते हैं और बलात्‍कारी भी नहीं कहलाते. रिश्‍ते में हक से बलात्‍कार करते हैं.

सरेआम बलात्‍कार करते हैं और धर्म के रक्षक कहलाते हैं. हम बंदूक की ज़ोर पर बलात्‍कार करते हैं और 'अपनी' श्रेष्‍ठ जाति के श्रेष्‍ठ योद्धा बन जाते हैं. हम जिनके साये से भी कोसों दूर रहना चाहते हैं, उनकी देह की ख़ूश्‍बू के लिए हर ज़ोर आज़ामइश करते हैं. हम बलात्‍कार करते हैं. हम मर्द हैं.

Thursday, November 21, 2019

इलेक्टोरल बॉन्ड को लेकर लोकसभा में हंगामा, कांग्रेस ने कहा प्रधानमंत्री जवाब दें

संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान कांग्रेस ने सदन में इलेक्टोरल बॉन्ड का मुद्दा उठाया. दोनों सदनों में कांग्रेस ने इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे को उठाया. इसकी वजह से राज्यसभा की कार्रवाई एक घंटे के लिए स्थगित करनी पड़ी.

वहीं लोकसभा में मनीष तिवारी ने इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि चुनावी बॉन्ड जारी करने के कारण सरकारी भ्रष्टाचार को स्वीकृति दे दी गई है.

उन्होंने इसे सियासत में पूंजीपतियों का दखल भी करार दिया.

मनीष तिवारी ने कहा, "2017 से पहले इस देश में एक मूलभूत ढांचा था. उसके तहत जो धनी लोग हैं उनका भारत के सियासत में जो पैसे का हस्तक्षेप था उस पर नियंत्रण था. लेकिन 1 फ़रवरी 2017 को सरकार ने जब यह प्रावधान किया कि अज्ञात इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए जाएं जिसके न तो दानकर्ता का पता है और न जितना पैसा दिया गया उसकी जानकारी है और न ही उसकी जानकारी है कि यह किसे दिया गया. उससे सरकारी भ्रष्टाचार पर अमलीजामा चढ़ाया गया है."

मनीष तिवारी ने ये भी कहा कि "इलेक्टोरल बॉन्ड स्कीम सिर्फ चुनावों तक सीमित थी, लेकिन 2018 में एक आरटीआई में सामने आया कि सरकार ने इल्क्टोरल बॉन्ड को लेकर आरबीआई के विरोध को भी दरकिनार कर दिया गया. इस पर सरकार जवाब दे."

इलेक्टोरल बॉन्ड के मुद्दे पर कांग्रेसी सांसद शशि थरूर ने कहा कि, "इसके जरिए कारोबारी और अमीर लोग सत्ताधारी पार्टी को चंदा देकर राजनीतिक हस्तक्षेप करेंगे."

उन्होंने कहा, "जब ये बॉन्ड पेश किए गए थे, तो हममें से कई लोगों ने गंभीर आपत्ति जताई थी लेकिन हमारी नहीं सुनी गई."

उधर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता कपिल सिब्बल ने कहा, "इलेक्टोरल बॉन्ड का 95 फ़ीसदी पैसा बीजेपी को गया, क्यों गया, ये क्यों हुआ. 2017 के बजट में अरुण जेटली ने इलेक्टोरल बॉन्ड पर जो रोक लगाई थी उसे ख़त्म कर दिया गया. अरुण जेटली ने यह रोक लगाई थी कि कोई भी कंपनी अपने लाभ के 15 फ़ीसदी से अधिक ज़्यादा पैसा नहीं लगा सकती. लेकिन अब उसे हटा लिया गया है. प्रधानमंत्री को इस पर जवाब देना होगा."

कांग्रेस सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि "इलेक्टोरल बॉन्ड एक बहुत बड़ा घोटाला है, देश को लूटा जा रहा है."

वहीं संसदीय कार्य मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस मुद्दे को शून्य काल में उठाने की बात की. उन्होंने कहा, "शून्यकाल का इतिहास बन चुका है. भ्रष्टाचार का मुद्दा उस वक्त था तो हम वेल में आते थे. हमारी सरकार में भ्रष्टाचर का एक भी मुद्दा नहीं है आप शून्यकाल में अपना मुद्दा उठाइए. विपक्ष के पास इसे लेकर केवल राजनीति करनी है."

दरअसल भारत में राजनीतिक दलों को भले ही अपनी आय का ब्योरा सार्वजनिक करना होता है लेकिन उनकी फ़ंडिंग को लेकर पारदर्शिता नहीं होती.

बीते वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार ने इलेक्टोरल बॉन्ड जारी किए थे जिनके ज़रिए उद्योग और कारोबारी और आम लोग अपनी पहचान बताए बिना चंदा दे सकते हैं.

दानकर्ताओं ने इन बॉन्ड के ज़रिए 150 मिलियन डॉलर यानी क़रीब 10 अरब 35 करोड़ रुपए का चंदा दिया है और रिपोर्ट्स के मुताबिक़ इनमें से ज़्यादातर रक़म बीजेपी को मिली है.

इसी वर्ष अप्रैल में सुप्रीम कोर्ट ने अपने अंतरिम आदेश में इलेक्टोरल बॉन्ड पर तत्काल किसी रोक को लगाए बगैर सभी पार्टियों से अपने चुनावी फंड की पूरी जानकारी देने को कहा.

कोर्ट ने सभी राजनीतिक दलों से कहा कि चुनावी बॉन्ड के मार्फ़त चंदा देने वालों की पूरी जानकारी, कितना चंदा मिला, हर बॉन्ड पर कितनी राशि प्राप्त हुई उसकी पूरी जानकारी चुनाव आयोग को उपलब्ध कराएं.

इस मामले की सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वो इस तरह की फंडिंग के ख़िलाफ़ नहीं लेकिन चंदा देने वाले शख़्स की पहचान अज्ञात रहने के ख़िलाफ़ है.